इस बार नव वर्ष पर कोहरा काफी कम रहा ।
लेकिन आज सुबह जब उठे और बाहर झाँका तो यह नज़ारा नज़र आया ।

सुबह के आठ बजे तक भी सामने वाला ब्लॉक मुश्किल से दिखाई दे रहा था ।

बालकनी में झाँका तो यह कबूतर नज़र आया ।

दरवाज़ा खोल कर सामना हुआ ।

हमें फोटो लेते देख , यह भी पीछे देखने लगा ।

जहाँ नीचे सड़क बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही थी ।
धुंध को घर से देखकर तो बड़ा मज़ा आता है । लेकिन ऐसे में यदि बाहर निकलना पड़े तो डर भी लगता है ।
लेकिन काम पर जाना ही होता है । इसलिए निकल पड़ते हैं राम का नाम लेकर ।
बाप रे कमाल का कोहरा है...अभी दो दिनों पहले खोपोली में भी ऐसा ही कोहरा नज़र आया था जो नौ बजते बजते गायब हो गया...
जवाब देंहटाएंनीरज
सुंदर चित्र, वैसे कल हमने भी धुंध पकड़ने की कोशिश की। हमारे यहां दो दिन से होने लगी है। लेकिन जल्दी छंट जाती है।
जवाब देंहटाएंकल हमारे शहर में भी ऐसी ही धुंध थी लेकिन जल्दी छंट गई थी. आपने फोटो खीच हमें भी दर्शन करा दिए इसके लिए धन्यवाद् हमने तो बस स्वांत:सुखी कविता कर ली.
जवाब देंहटाएंदेख कर ही कँपकपी लग रही है।
जवाब देंहटाएंprakritik chhataon se apka anurag es had tk hai dekh kr anukarneey anubhuti ....badhai.
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर चित्र देखने में, पर असलियत में ठण्ड से बुरा हाल है..
जवाब देंहटाएंये कोहरा तो फिर भी छट जाएगा लेकिन राजनीतिक और सामाजिक कोहरा ?
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