गुरुवार, 5 जनवरी 2012

दिल्ली में २०१२ की पांचवीं सुबह कुछ ऐसी थी --

इस बार नव वर्ष पर कोहरा काफी कम रहा ।
लेकिन आज सुबह जब उठे और बाहर झाँका तो यह नज़ारा नज़र आया ।


सुबह के आठ बजे तक भी सामने वाला ब्लॉक मुश्किल से दिखाई दे रहा था ।



बालकनी में झाँका तो यह कबूतर नज़र आया ।





दरवाज़ा खोल कर सामना हुआ ।




हमें फोटो लेते देख , यह भी पीछे देखने लगा ।




जहाँ नीचे सड़क बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही थी ।

धुंध को घर से देखकर तो बड़ा मज़ा आता है । लेकिन ऐसे में यदि बाहर निकलना पड़े तो डर भी लगता है ।
लेकिन काम पर जाना ही होता है । इसलिए निकल पड़ते हैं राम का नाम लेकर ।

7 टिप्‍पणियां:

  1. बाप रे कमाल का कोहरा है...अभी दो दिनों पहले खोपोली में भी ऐसा ही कोहरा नज़र आया था जो नौ बजते बजते गायब हो गया...

    नीरज

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  2. सुंदर चित्र, वैसे कल हमने भी धुंध पकड़ने की कोशिश की। हमारे यहां दो दिन से होने लगी है। लेकिन जल्दी छंट जाती है।

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  3. कल हमारे शहर में भी ऐसी ही धुंध थी लेकिन जल्दी छंट गई थी. आपने फोटो खीच हमें भी दर्शन करा दिए इसके लिए धन्यवाद् हमने तो बस स्वांत:सुखी कविता कर ली.

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  4. prakritik chhataon se apka anurag es had tk hai dekh kr anukarneey anubhuti ....badhai.

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  5. बहुत सुन्दर चित्र देखने में, पर असलियत में ठण्ड से बुरा हाल है..

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  6. ये कोहरा तो फिर भी छट जाएगा लेकिन राजनीतिक और सामाजिक कोहरा ?

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