गुरुवार, 22 मार्च 2012

ज़रा सोचिये , आगे क्या हुआ होगा !





आगे है नायाग्रा फाल ,
अब क्या होगा इनका हाल !



वो देखो बर्फ का पहाड़ ,
क्या काम आएगा ये जुगाड़ !





हवा में जब कंपनी मिल गई ,
अपनी तो हवा ही निकल गई !



हिंदी चीनी तो भाई भाई ,
पर अंग्रेज़ की शामत है आई !

तलवारों की धार है तेज ,
अब तेरा क्या होगा अंग्रेज़ !




समझे थे जंगल को हमाम ,
फिर भला कपड़ों का क्या काम !

अबे अब काहे को उछलता है ,
यहाँ कानून बस हमारा चलता है !

ज़रा बताइये --सबसे ज्यादा खतरनाक कौन सा लगा .
और सबसे फन्नी कौन सा !

13 टिप्‍पणियां:

  1. उपर के तीन खतरनाक……… बीच वाला हौलनाक ………… आखरी वाला बेनाक……………:)

    उत्तर देंहटाएं
  2. डॉ दराल
    हमारी वाणी की फीड से यहाँ आयी थी वहाँ तस्वीर नहीं दिखती हैं , जो दिख रहा था उसको पढ़कर एक और ब्लॉगर की याद आगयी तुकांत कवि हैं वो , सोचा देख लूँ आप को क्या हुआ हैं !!!!! ख़ैर तस्वीर के साथ पढने से रुख बदल गया
    तस्वीर के साथ तुकबंदी बढ़िया लगी

    उत्तर देंहटाएं
  3. शुक्रिया , रचना जी . यह पोस्ट बस मौज मस्ती के लिए है .
    all work and no play , makes Jack a dull boy !

    उत्तर देंहटाएं
  4. शेर बहुत शैतान लगा...मजेदार चित्र...

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति| नवसंवत्सर २०६९ की हार्दिक शुभकामनाएँ|

    उत्तर देंहटाएं
  6. मैं तो आखिरी वाली तस्वीर देखकर हैरान हूं। ये नंगू अमिताभ की शैली में बायें हाथ से खूंखारों को खदेड़ रहा है और जानवर भी हैं कि जान बचाकर भागे जा रहे हैं!

    उत्तर देंहटाएं
  7. हा हा हा ! नंग इंसान से जानवर भी डरते हैं .

    उत्तर देंहटाएं
  8. हमको तो सारे के सारे दमदार लगे।

    उत्तर देंहटाएं
  9. समझे थे जंगल को हमाम ,
    फिर भला कपड़ों का क्या काम !
    आगे क्या होता हाल ,

    सब फटोग्रेफी का है कमाल .

    लोगों को नियाग्रा से लटका भी दिखा देतें हैं ,यहाँ फटोग्रेफर साहब .

    उत्तर देंहटाएं
  10. सही कहा वीरुभाई जी .
    फोटोग्राफर भी कवि की तरह कल्पना का इस्तेमाल ज्यादा करता है .

    उत्तर देंहटाएं