पार्क में घुसते ही ये खाने पीने की दुकाने हैं । प्रष्ठ भूमि में शांति स्तूप ।
वहां जाने के लिए इस गेट से होकर जाना पड़ता है ।
एक एंगल से ।
यह चोटी शहर में पहाड़ का अहसास देती हुई ।
यहाँ एक छोटा सा जंगल भी है --एकदम घना ।
रास्ता बना है स्तूप तक जाने के लिए ।
साथ में रेलवे लाइन ।
सचमुच दिल्ली बहुत हरी भरी है ।
यकीन ही नहीं होता के ये सब हमारी दिल्ली में है...दिल्ली में इस तरह के स्मारक, हरियाली और साफ़ सफाई देख कर दिल खुश हो जाता है...आपके फोटोग्राफी के इस शौक के चलते हमें भी दिल्ली के खूबसूरत नजारों के दर्शन घर बैठे ही हो जाते हैं...फोटो खींचते रहिये और हमें दिखाते रहिये...
जवाब देंहटाएंनीरज
वो पहाडी पर बर्फ़ जेसी क्या चीज हे जी, वेसे आप के केमरे की तारीफ़ जरुर करुगां जिस ने हमे इतनी सुंदर दिल्ली दिखा दी, धन्यवाद
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर चित्र , बगल में ही आई टी ओ पर काम करता हूँ पर आज तक नहीं गया , अब तस्वीर देख कर जाने की इच्छा हो रही है
जवाब देंहटाएंbahut sunder.... aapka blog to bahut achha laga...
जवाब देंहटाएंअनुमान था कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा लेकिन जहां तक मुझे स्मरण है,इसकी कहीं कोई चर्चा नहीं हुई।
जवाब देंहटाएंतमाम बौद्ध केंद्र शांति के अनन्य स्थल रहे हैं। जैसे नेहरू पार्क मॉर्निंग रागा कार्यक्रम के लिए चर्चित रहा,वैसे ही यहां विपश्यना का कोई वृहद् कार्यक्रम चलाया जाए,तो बहुत सफल हो सकता है।
आपने सही कहा राधारमण जी । लेकिन क्या करें , देखने वाला कोई आया ही नहीं । आखिर मिडिया ने असर दिखा ही दिया । वैसे यह क्षेत्र बहुत खूबसूरत बना है । हो सकता है जल्दी ही यहाँ कुछ शुरू हो ।
जवाब देंहटाएंदीपावली के इस पावन पर्व पर आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें....
जवाब देंहटाएंकिसी स्वर्ग से कम नही लग रही दिल्ली। धन्यवाद।
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर चित्र हैं ।
जवाब देंहटाएंकई बार इस पार्क को हमने गुजरते हुए देखा, अंदर जाने की बहुत इच्छा होती थी, परंतु हर बार समय की कमी के कारण बाहर से निकल लेते थे। आज आपके कैमरे से पार्क घूम भी लिये और याद भी कर लिये।
जवाब देंहटाएंविद्यालयों में बच्चों को सजा देना कितना उचित ? मुझे भी अपने बेटे की चिंता हो रही है... क्या आपको है..? (Molestation in School)
इसे कहते है दीवानगी
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