रविवार, 29 अगस्त 2010

मौसम के अनेक रूप , तस्वीरों के संग ----

जाने क्यों आज
मौसम के मिज़ाज़ उखड़े उखड़े से हैं,
हवाएं भी उदास आ रही हैं नज़र ।

इसी उदासी को मिटाने के लिए चलिए प्रस्तुत हैं कुछ मेरी पसंद की तस्वीरें ।


बादलों की छटा , झील के पानी में उतर आई है



यहाँ किस का रंग , किस पर चढ़ गया है , पता ही नहीं ।



एक प्रतिबिम्ब ऐसा भी ।




ये कौन सी जगह है दोस्तों ---




रात में इंडिया गेट का नज़ारा ।




ये सूरज मुर्झा गया है या चाँद जल्दी निकल आया है ।




आदमी इतना स्वार्थी भी नहीं है !




किस सोच में पड़े हो तुम ---




अब तक तो तबियत रंग बिरंगी हो गई होगी ।



हरियाणवी लोक नृत्य के ठुमके देखकर कोई उदासी टिक नहीं सकती ।

15 टिप्‍पणियां:

  1. bahut badhiya hai bhai sab.
    aaj to sari dilli ghuma di.
    ek Ragani aur laga deni thi.
    fer mauja hi mauja ho jaati.

    Ram Ram

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  2. ललित जी , इसी गाने का वीडियो किसी पोस्ट में पहले दे चुके हैं ।
    सुनकर मस्ती आ जाती है ।

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  3. अधिकतर चित्र सधे हाथों से लिए गए हैं। चौथी तस्वीर में,आप बांयी ओर होते तो बेहतर होता। पहली और दूसरी तस्वीर की गहन व्याख्या संभव।

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  4. सभी चित्र एक से बढ कर एक जी, बहुत सुंदर. धन्यवाद

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  5. नयनाभिराम चित्र देख कर सारी उदासी दूर हो गयी...बहुत बहुत शुक्रिया आपका...
    नीरज

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  6. डॉ. टी. एस. दराल साहब
    नमस्कार !
    बहुत दिन से मुलाकात नहीं हो पाई …

    चित्र तो बहुत ख़ूबसूरत लगा रखे हैं , कुछ हमने चुरा लिए तो … ?
    फिर न कहना !
    बाकी तो समझ में आ गए , पूरी जानकारी दिए बिना भी …
    हां ,… ये जो पेड़ और जाली से कोहनी टिकाए हीरोनुमा नौजवान लड़का खड़ा है , कौन है

    आपसे इल्तिज़ा है कि जानकारी जुटा कर ही चित्र लगाया कीजिए …


    शुभकामनाओं सहित …

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  7. हा हा हा ! राजेन्द्र जी , ये हमारी ज़वानी के दिनों के फोटो हैं , जो कुछ महीने पहले खींचे गए थे ।
    वैसे तारीफ करने का ये तरीका भी निराला है ।

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  8. I like the view of India Gate....and my beautiful purple flowers....
    Vah ji vah maza aa gya !!

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  9. डॉ. साहिब,

    सुन्दर चित्रों को देखकर चित्र दिखाने वाले के सुन्दर ख्याल दिखाई देने लगें हैं।

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  10. वाह....एक से बढ़कर एक चित्र...... हम तो आप के चित्रों के माध्यम से ही वहाँ घूम आये.......धन्यवाद....

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  11. बेहद खूबसूरत तस्वीरे है डॉक्टर साहब अपनी भी तबियत हरी हो गई और नीचे के कैप्शन और भी बढिया ।

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  12. सभी चित्र एक से बढ कर एक जी, बहुत सुंदर....हरियाणवी लोक नृत्य के ठुमके देखकर कोई उदासी टिक नहीं सकती । क्या बात !!!!!!

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