गुरुवार, 23 सितंबर 2010

कुछ तस्वीरें , यादों के पिटारे से ----

प्रस्तुत हैं कुछ तस्वीरें , यादों के पिटारे से ----




दूर इस झील के पार हमारा घर है ----।



ओहरे ताल मिले नदी के जल में , नदी मिले सागर में ---।




उफान पर नदी ।



अंग्रेजों की रातें बड़ी रंगीन होती हैं ---।



शाम होते ही पंछी घर की ओर चल देते हैं ----।



दो देश ---एक तरफ दिन , एक तरफ रात ----।



चौड़े पाट वाली नदी , कैसा रूप धारण कर लेती है ----।




थोडा दाना हमें भी ----।




आजा शाम होने आई , मौसम ने ली अंगडाई ----।




ये छोटे छोटे हवाई ज़हाज़ हैं या ----। क्या उड़ान है !



इंसान का सच्चा स्वरुप ----।




इस गाड़ी का नाम जानते हैं ?



शांत झील में थोड़ी सी खलबली ----।



ये शांत झील और ये शाम का समां ----।



ये कहाँ आ गए हम ---ये आ रहे हैं या जा रहे हैं ?


11 टिप्‍पणियां:

  1. ेक से बढ कर एक बढिया तस्वीर। अगर ये भी बता देते कि कहाँ की हैं तो और भी अच्छा लगता। धन्यवाद।

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  2. अंग्रेजों की रातें बड़ी रंगीन होती हैं.

    हम भी जंगल में मंगल मनाते हैं...
    भले ही रातें काली क्यों न हों....
    सुन्दर चित्र हैं भाई साहब

    राम राम

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  3. क्या तस्वीरे है , कहाँ की है

    मृत्युंजय कुमार राय

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  4. वाह..केनेडा का नियाग्रा जल प्रपात घुमा दिया आपने...बेहतरीन तस्वीरें...एक से बढ़ कर एक...

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  5. निर्मला जी , ये तस्वीरें कनाडा के टोरोंटो शहर और नायग्रा फाल्स की हैं ।

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  6. सब से पहले तो...इस गाड़ी का नाम जानते हैं ?
    क्यो नही जनाब यह है हामा हा २,(Hummer H 2) बनी है अमेरिका की, बाकी सभी चित्र बहुत सुंदर लगे, ओर इस फ़ाल्स को तो खुब पहचानते है जी, धन्यवाद

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  7. सही बताया भाटिया जी । हमें ही याद नहीं आ रहा था । आभार ।

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  8. पहले एक कैमरा ख़रीद लूं। फिर आता हूं आपके पास गुर सीखने।

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