सोमवार, 13 अगस्त 2012

स्वतंत्रता दिवस की ६५ वीं वर्षगांठ पर -- शहीदों के नाम ...




विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध मैदान -- सियाचिन , जहाँ वर्ष के हर दिन बर्फ में ढके पहाड़ मनुष्य की ताकत और सहनशीलता को चुनौती देते हैं .

क्या पाकिस्तान के कहने पर यहाँ से फौजों को हटाया जा सकता है ?





हर मौसम , हर हाल में , दिन रात मुस्तैद रह कर रक्षा करते हैं ये सीमा की .





यही घर है , यही रैन बसेरा -- यही महल है इनका .





ये बर्फीली पहाड़ियां ही जीवन है इनका .





झील का ठंडा पानी पीकर मस्त रहते हैं ये बाँकुरे .




शहीदों को नमन .




यदि ये न होते तो आज हम सुख शांति की जिंदगी न जी रहे होते .

नोट : आभार डॉ राजेश सोबती .


10 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसे सैनिकों को हमारा भी नमन......

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  2. इन सैनिकों ने हमे बधाई देने लायक रख छोड़ा है। स्वतंत्रता दिवस की बधाई स्वीकार करें सर जी।

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  3. नाज़ है इन रणबांकुरों पर... जय हिंद!

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  4. भारत माँ के इन वीर सपूतों को नमन...जय हिंद

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  5. किसी का रोमांच,किसी की जान
    किसी की सीमा,किसी की शान!

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  6. समर्पित गौरवान्वित करती पोस्ट जाँ बाजों के जीवन को .कृपया यहाँ भी पधारें http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

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