शनिवार, 5 मई 2012

मन मोर मचाये शोर --



देखते हैं , कुछ देसी विदेशी मोर , विभिन्न रंग रूपों में :



नदी के पार जंगल किनारे बैठा यह मोर जब पिहू पिहू कर रहा होगा , तब वातावरण कितना सुहाना लग रहा होगा ।
मोर की उड़ान














मयूर नृत्य












सफ़ेद मोर









नोट : पहले चित्र को छोड़कर , सभी मेल से प्राप्त

10 टिप्‍पणियां:

  1. उड़ते मोर के नयनाभिराम चित्र...नैट को खूब खंगाला है आपने...बधाई

    नीरज

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    लिंक आपका है यहीं, मगर आपको खोजना पड़ेगा!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. ..मनमोर हुआ मतवाला किसने जादू डाला रे ,किसने जादू डाला .....जादू वही जो सिर चढ़के बोले ,बढ़िया रागरंग भरते चित्र राष्ट्रीय पक्षी के . ....कृपया यहाँ भी पधारें -http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_7883.html./http://veerubhai1947.blogspot.in/
    शनिवार, 5 मई 2012
    चिकित्सा में विकल्प की आधारभूत आवश्यकता : भाग - १


    स्कूल में चरस और गांजा ,भुगतोगे भाई, खामियाजा

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  4. वाह !!!!!!!!!!!!सुंदर प्रकृति की अनमोल देन

    रंग बिरंगे मोर लख, मन हो गया विभोर
    मन का मयूरा कूकता , ये दिल मांगे मोर

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  5. नृत्य का संबंध यों तो लिंग से नहीं है,परन्तु व्यवहार-जगत में मादा अथवा स्त्री ही नृत्य का पर्याय रही है। यह पहली बार हुआ कि किसी नर ने दुनिया को दिखाया कि प्रफुल्लित मन कैसा होता है। इसलिए, मोर का नृत्य विशिष्ट है।

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    1. गोपियों संग कृषण जी ने भी नृत्य किया था । :)

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