वाह बहुत ही सुंदर चित्रों के साथ आपने बड़े ही शानदार ढंग से प्रस्तुत किया है! दिल्ली कि बात ही कुछ और है! सही में इंडिया गेट में घूमना और बोटिंग करने में कुछ अलग ही मज़ा है!
बहुत बहुत धन्यवाद्! क्यूंकि मैं बचपन में, पिताजी के सरकारी कर्मचारी होने के कारण, इस इलाके (DIZ) में कई वर्ष रहा तो कहने की आवश्यकता नहीं है कि हम बच्चों के लिए यह सुंदर स्थान हमारा क्रीडास्थल था...
पुरानी यादें ताजा हो गयीं...तब नहर के किनारे जामुन के पेड़ होते थे और मुफ्त में फल भी (चोरी-चोरी) खाने को मिलते थे, और अब डॉक्टर इसे खाने कि हिदायत देते हैं तो इसके ऊंचे दाम के कारण मुट्ठी खोलनी मुश्किल हो जाती है (क्यूंकि 'चोरी का फल मीठा होता है' :) और तब इतनी रंगीन नावें भी नहीं थीं...नैनीताल में जिसने नाव चला ली हो तो उसके लिए उस समय उपलब्ध नावों के चप्पू ही बहुत भारी लगते थे :)
इसी स्थान पर हम बच्चों को एक ऐसा अवसर मिला जो आज संभव नहीं है: जब तत्कालीन राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद ने हमें अपनी खुली गाड़ी में बैठे पहले नमस्कार किया! हम कुछ बच्चे तो राष्ट्रपति भवन से उनकी गाड़ी आती देख, बिना सिक्यूरिटी गार्ड आदि के, सड़क के किनारे खड़े हो गए थे और उन्हें नमस्कार करते देख उन्हें बाद में नमस्कार किये :)
बाद में २६ जनवरी की परेड कई बार देखने को मिली - हर वर्ष बढती भीड़ और बढती सिक्यूरिटी के इंतजाम के कारण उत्पन्न रूकावट और इस कारण बाद में असुविधा के साथ...
मेडिकल डॉक्टर, न्युक्लीअर मेडीसिन फिजिसियन--
ओ आर एस पर शोध में गोल्ड मैडल--
एपीडेमिक ड्रोप्सी पर डायग्नोस्टिक क्राइटेरिया --
सरकार से स्टेट अवार्ड प्राप्त--
दिल्ली आज तक पर --दिल्ली हंसोड़ दंगल चैम्पियन --
नव कवियों की कुश्ती में प्रथम पुरूस्कार ---
अब ब्लॉग के जरिये जन चेतना जाग्रत करने की चेष्टा --
अपना तो उसूल है, हंसते रहो, हंसाते रहो. ---
जो लोग हंसते हैं, वो अपना तनाव हटाते हैं. ---
जो लोग हंसाते हैं, वो दूसरों के तनाव भगाते हैं. ---
बस इसी चेष्टा में लीनं.
आपकी नज़रों से दिल्ली देखने का मजा ही कुछ और है...बहुत नयनाभिराम चित्र...
जवाब देंहटाएंनीरज
वाह बहुत ही सुंदर चित्रों के साथ आपने बड़े ही शानदार ढंग से प्रस्तुत किया है! दिल्ली कि बात ही कुछ और है! सही में इंडिया गेट में घूमना और बोटिंग करने में कुछ अलग ही मज़ा है!
जवाब देंहटाएंवाह बहुत ही सुंदर चित्रों के साथ आपने बड़े ही शानदार ढंग से प्रस्तुत किया है!
हटाएंवाह बहुत ही सुंदर चित्रों के साथ आपने बड़े ही शानदार ढंग से प्रस्तुत किया है!
हटाएंबहुत बहुत धन्यवाद्! क्यूंकि मैं बचपन में, पिताजी के सरकारी कर्मचारी होने के कारण, इस इलाके (DIZ) में कई वर्ष रहा तो कहने की आवश्यकता नहीं है कि हम बच्चों के लिए यह सुंदर स्थान हमारा क्रीडास्थल था...
जवाब देंहटाएंपुरानी यादें ताजा हो गयीं...तब नहर के किनारे जामुन के पेड़ होते थे और मुफ्त में फल भी (चोरी-चोरी) खाने को मिलते थे, और अब डॉक्टर इसे खाने कि हिदायत देते हैं तो इसके ऊंचे दाम के कारण मुट्ठी खोलनी मुश्किल हो जाती है (क्यूंकि 'चोरी का फल मीठा होता है' :) और तब इतनी रंगीन नावें भी नहीं थीं...नैनीताल में जिसने नाव चला ली हो तो उसके लिए उस समय उपलब्ध नावों के चप्पू ही बहुत भारी लगते थे :)
इसी स्थान पर हम बच्चों को एक ऐसा अवसर मिला जो आज संभव नहीं है: जब तत्कालीन राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद ने हमें अपनी खुली गाड़ी में बैठे पहले नमस्कार किया! हम कुछ बच्चे तो राष्ट्रपति भवन से उनकी गाड़ी आती देख, बिना सिक्यूरिटी गार्ड आदि के, सड़क के किनारे खड़े हो गए थे और उन्हें नमस्कार करते देख उन्हें बाद में नमस्कार किये :)
बाद में २६ जनवरी की परेड कई बार देखने को मिली - हर वर्ष बढती भीड़ और बढती सिक्यूरिटी के इंतजाम के कारण उत्पन्न रूकावट और इस कारण बाद में असुविधा के साथ...