गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014
शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014
मंगलवार, 11 फ़रवरी 2014
सुहानी धूप और आसमान से झांकता चाँद -- नेहरू पार्क !
रविवार का दिन , फुर्सत के कुछ पल , नर्म सुहानी धुप और श्रीमती की फरमाईश पर नेहरू पार्क की सैर हो गई। आप भी चलिए हमारे साथ :
सुन्दर पगडंडी।
पाम ट्री से मैचिंग !
धूप छाँव का मेल।
एक झील भी है।
गुलाब वाटिका।
धूप में खिला गुलाब और चाँद।
गुलाब छाया में।
गुलाबी गुलाब।
निर्मल सफ़ेद गुलाब।
बेगनबेलिया का पेड़ या पेड़ पर बेगनबेलिया !
शनिवार, 25 जनवरी 2014
सीजनल फूलों की बहार -- मेक हे वाइल द सन शाइंस !
क्या आपने कभी फूलों को ध्यान से देखा ? एक नज़र देखते ही देखिये कैसे सारी थकान उतर जाती है , सारे तनाव मिट जाते हैं।
फूलों के रंग , आकृति और नाज़ुकपन बरबस मन मोह लेता है।
इसे देखिये , कैसे चिलमन के पीछे से झांकती दुल्हन के चेहरे सा लग रहा है।
यह तो मानो कोई शरमाई सी षोडशी अधखुले किवाड़ के पीछे से झाँक रही हो !
किसी नवयौवना के खिले रूप सा यह पुष्प देखकर तो कोई भी दीवाना हो सकता है ।
इसने तो जैसे शादियों के सीजन में श्रृंगार कर लिया हो।
एक परिपक्व पुष्प एक अधखिली कलि के साथ रोमांस करता हुआ।
ये वाला तो मस्त है बॉस !
रंग ए हरियाली।
इसका अपना अंदाज़ है।
गुलाबी तो है पर गुलाब नहीं।
पीताम्बर।
ये वाला तो जैसे स्टाइल मार रहा है।
नोट : ये फूलों की बहार सीजनल है। मेक हे वाइल द सन शाइंस !
गुरुवार, 23 जनवरी 2014
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