बुधवार, 17 अप्रैल 2013

द रिवरव्यू रिट्रीट -- एक अनुपम अनुभव।


रामनगर के पास ढिकुली गाँव सिर्फ नाम के लिए ही गाँव है। यहाँ बने हैं अनेकों रिजॉर्ट्स जो प्रकृति की गोद में आराम की सभी सुविधाएँ मुहैया कराते हुए आपको दो दिन में ही तरो ताज़ा होने का अहसास दिला देते हैं।  



ऐसा ही एक मनोरम स्थान था -- रिवरव्यू रिट्रीट। एक तरफ सड़क और दूसरी तरफ कोसी नदी।




दोनों के बीच में बने भवन में गेस्ट रूम्स -- लॉबी से झांकती हरियाली देखकर ही मन खुश हो जाता है।




रिजॉर्ट में अनेक कॉटेज बने हैं जो घनी हरियाली के बीच मन को बड़ी शांति प्रदान करते हैं।





घने पेड़ों से होते हुए यह फुटपाथ जाता है नदी की ओर जिसके किनारे बने हैं --




स्विमिंग पूल।





हरा भरा लॉन जहाँ क्रिकेट खेलने का भी इंतजाम है।




रेस्तरां जिसके सामने लॉन में पार्टियाँ की जाती हैं। नदी किनारे शाम के समय मौसम भी बहुत सुहाना होता है।




फूलों और पेड़ों के झुरमुट।




यह पौधा सुबह के समय मन को बहुत भा रहा था।  




नदिया के पार घना जंगल , मानो उम्मीद दिलाता हुआ कि अब आया कोई जंगली जानवर पानी पीने के लिए।

नोट : अगली बार देखिये -- जंगल की खूबसूरती।



शनिवार, 30 मार्च 2013

दिल्ली का मिलेनियम पार्क -- कुछ मनभावन तस्वीरें !


दिल्ली का मिलेनियम पार्क -- कुछ मनभावन तस्वीरें ! 




पत्थरों के शहर में इन्सान ढूंढ रहे हैं।





नाज़ुक फूल -- बस इंसानों की हैवानियत से बच जाएँ !




बड़े की छाँव में पलता छोटा।




प्रकृति की छटा -- पूरे जोबन पर।





प्रकृति और भौतिकी -- साथ साथ।






दिल बाग बाग़ करती हरियाली।





छोटा पर सुन्दर।





दूसरे जहाँ की ओर --- एक दिन के लिए।





चमक अभी बाकि है।





कभी अलविदा ना कहना।



शुक्रवार, 15 मार्च 2013

फोटोग्राफी के शौकीनों को बस बहाना चाहिए ---


आज फिर फोटोग्राफी का मूड बना है।  



अस्पताल के द्वार से बाहर का दृश्य।





अस्पताल प्रांगन।






 बसंत का प्रभाव यहाँ भी है।





स्वामी तो नहीं लेकिन जिम्मेदारी तो है।





हैप्पी आवर के दौरान।




मंगलवार, 5 मार्च 2013

चलो गाँव की ओर ---


चलो गाँव की ओर ---





गाँव का एक आम लेकिन गाँव विशेष नज़ारा।





गन्ने से लदा ट्रैक्टर सीधा गन्ने के खेत से ।





गाँव की क़ुतुब मीनार --- ब्रिक किल्न की चिमनी ।





इस पेड़ के लिए न बसंत है , न बहार।






गाँव को जाती सड़क या गाँव से आती भी ।





एक घर की बैठक। घरवाले सभी बारात देख रहे हैं। सर्दियों की नर्म धूप में आँगन में लेटे हुए।   






गाँव की जिंदगी में जुगाड़ का बड़ा महत्त्व होता है।



सोमवार, 14 जनवरी 2013

सियाचिन की बर्फीली पहाड़ियों पर सुरक्षा में तैनात बहादुर जांबाज़ सैनिकों को नमन --


सियाचिन की बर्फीली पहाड़ियों पर हमारे जांबाज़ सैनिक।  


विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध स्थल सदा बर्फ से ढका रहता है।  




यहाँ दुश्मन के साथ साथ कडकडाती ठण्ड का भी सामना करना पड़ता है। 




यही इनका बंगला है , यही महल।  





हाथ से हाथ मिलाकर , बर्फ से ढकी ऊंची पहाड़ियों पर गश्त लगाना निश्चित ही बहुत जोखिम भरा काम है। 




प्यास लगे तो प्राकृतिक बिसलेरी है। 




इनके लिए रसद पहुँचाने का बस यही एकमात्र साधन है। 



इनके साहस , ताकत और होंसले का कोई ज़वाब नहीं। 



यह साइनबोर्ड याद दिलाता है कि आप कहाँ खड़े हैं। 






वॉर मेमोरियल --शहीदों के सम्मान में। 


देश के सम्मान और सरहद की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले इन रणबांकुरे बहादुर नौज़वानों को शत शत नमन। 




शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

पक्षियों का समाज ---




देखिये क्या हम पक्षियों से कुछ सीख सकते हैं ! 





साँझ ढले पंछियों का कलरव। 




कभी तकरार है।  






तो कभी प्यार है। 

ज़ाहिर है , पक्षी भी सामाजिक प्राणी हैं। लेकिन इंसानों की तरह समाज पर कलंक नहीं लगाते ।