नोट : लोदी गार्डन का पूरा विवरण यहाँ देख सकते हैं ।
मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012
बुधवार, 1 फ़रवरी 2012
दिल्ली के दिल्ली हाट में शिशिर सरस मेला --
दिल्ली के दिल्ली हाट में हर साल लगता है --ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी और मेला । यहाँ देश के विभिन्न राज्यों के कास्तकार अपने आर्ट और क्राफ्ट की सेल लगाते हैं ।
प्रवेश द्वार --एंट्री टिकेट मात्र २० रूपये ।
दक्षिण भारतीय आर्ट ।
यह पेंटर वर्तमान हालातों का पूरा फायदा उठाते हुए अपनी कला का प्रदर्शन कर रहा था ।
भीड़ का एक मनोरम दृश्य ।
ओपन एयर थियेटर जहाँ शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं ।
मोडर्न आर्ट --एक नमूना ।
शो से पहले आराम फरमाती हुई कठपुतलियां ।
ये ग्रामोफोन बीते दिनों की याद दिलाते हुए ।
खाने के लिए सभी राज्यों की स्टाल लगी हैं जहाँ स्वादिष्ट खाना उचित दाम पर मिलता है ।
मेले में हैंडीक्राफ्ट्स का सामान सीधे कारीगरों से खरीदना का अच्छा अवसर मिलता है । आप चाहें तो खूब बारगैनिंग भी कर सकते हैं ।
मेले में हैंडीक्राफ्ट्स का सामान सीधे कारीगरों से खरीदना का अच्छा अवसर मिलता है । आप चाहें तो खूब बारगैनिंग भी कर सकते हैं ।
शुक्रवार, 27 जनवरी 2012
अद्भुत तस्वीरें -- कौन सी लगी सबसे मजेदार !
जल बिच मीन पियासी
देश का भविष्य
देश का भविष्य
तो बताइये , कौन सा लगा सबसे मजेदार !
नोट : सभी चित्र साभार श्री जे सी जोशी जी से ई-मेल द्वारा प्राप्त !
शनिवार, 21 जनवरी 2012
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला -२०११
गुरुवार, 12 जनवरी 2012
यदि हाथ में कैमरा हो और मन में उत्साह--
कैमरा भी कभी कभी अविस्मरणीय पलों को कैद कर लेता है । प्रस्तुत हैं , ऐसे ही हैरत में डालने वाले , लेकिन हंस हंस कर लोट पोट कर देने वाले, कुछ फोटो जो हमें एक मित्र से इ-मेल द्वारा प्राप्त हुए ।
किस्मत अपनी अपनी ।
हेंड्स फ्री --बिहारी इस्टाइल । अब कोई पुलिस वाला भला क्या चालान कटेगा ।
अब चोर तो क्या चोर का बाप भी न साईकल चुरा सकता है , न चप्पलें ।
ज़रूर यह फोटो मंदिर के बाहर लिया गया होगा ।
गोवा की रंगीनियाँ । यहाँ सब कुछ रंगीन है ।
अरे दादी चिंता क्यों करती है । अभी पहुंचाते हैं तुम्हे दादा के पास ।
इसे कहते हैं --चक्के पे चक्का । लेकिन सीट रिजर्व्ड है भाई ।
परन्तु अपनी तो यही सवारी बेस्ट है बापू । अब सवारी है तो स्कूल पैदल क्यों जाऊं ।
ताकत आजमाने का यह तरीका भी बढ़िया है । इस हसीन लड़ाई पर वारी वारी जाऊं ।
लेकिन शांति से बिना लड़े भी हराया जा सकता है । देखिये वो मेन स्पेशल ।
कोई देख सुन रहा है !
नोट : ये फोटो किसने खींचे हैं , यह तो पता नहीं । लेकिन खींचने वाले की दाद देनी पड़ेगी । बहुत दिलचस्पी से फोटो उतारे हैं ।
वैसे भी यदि हाथ में कैमरा हो और मन में उत्साह , तो आँखें खुद ही तलाश कर लेती हैं ऐसे मनभावन पल ।
किस्मत अपनी अपनी ।
हेंड्स फ्री --बिहारी इस्टाइल । अब कोई पुलिस वाला भला क्या चालान कटेगा ।
अब चोर तो क्या चोर का बाप भी न साईकल चुरा सकता है , न चप्पलें । ज़रूर यह फोटो मंदिर के बाहर लिया गया होगा ।
गोवा की रंगीनियाँ । यहाँ सब कुछ रंगीन है ।
अरे दादी चिंता क्यों करती है । अभी पहुंचाते हैं तुम्हे दादा के पास ।
इसे कहते हैं --चक्के पे चक्का । लेकिन सीट रिजर्व्ड है भाई ।
परन्तु अपनी तो यही सवारी बेस्ट है बापू । अब सवारी है तो स्कूल पैदल क्यों जाऊं ।
ताकत आजमाने का यह तरीका भी बढ़िया है । इस हसीन लड़ाई पर वारी वारी जाऊं ।
लेकिन शांति से बिना लड़े भी हराया जा सकता है । देखिये वो मेन स्पेशल ।
कोई देख सुन रहा है ! नोट : ये फोटो किसने खींचे हैं , यह तो पता नहीं । लेकिन खींचने वाले की दाद देनी पड़ेगी । बहुत दिलचस्पी से फोटो उतारे हैं ।
वैसे भी यदि हाथ में कैमरा हो और मन में उत्साह , तो आँखें खुद ही तलाश कर लेती हैं ऐसे मनभावन पल ।
गुरुवार, 5 जनवरी 2012
दिल्ली में २०१२ की पांचवीं सुबह कुछ ऐसी थी --
इस बार नव वर्ष पर कोहरा काफी कम रहा ।
लेकिन आज सुबह जब उठे और बाहर झाँका तो यह नज़ारा नज़र आया ।
सुबह के आठ बजे तक भी सामने वाला ब्लॉक मुश्किल से दिखाई दे रहा था ।
बालकनी में झाँका तो यह कबूतर नज़र आया ।
दरवाज़ा खोल कर सामना हुआ ।
हमें फोटो लेते देख , यह भी पीछे देखने लगा ।
जहाँ नीचे सड़क बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही थी ।
धुंध को घर से देखकर तो बड़ा मज़ा आता है । लेकिन ऐसे में यदि बाहर निकलना पड़े तो डर भी लगता है ।
लेकिन काम पर जाना ही होता है । इसलिए निकल पड़ते हैं राम का नाम लेकर ।
लेकिन आज सुबह जब उठे और बाहर झाँका तो यह नज़ारा नज़र आया ।
सुबह के आठ बजे तक भी सामने वाला ब्लॉक मुश्किल से दिखाई दे रहा था ।
बालकनी में झाँका तो यह कबूतर नज़र आया ।
दरवाज़ा खोल कर सामना हुआ ।
हमें फोटो लेते देख , यह भी पीछे देखने लगा ।
जहाँ नीचे सड़क बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही थी ।धुंध को घर से देखकर तो बड़ा मज़ा आता है । लेकिन ऐसे में यदि बाहर निकलना पड़े तो डर भी लगता है ।
लेकिन काम पर जाना ही होता है । इसलिए निकल पड़ते हैं राम का नाम लेकर ।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)





