गुरुवार, 15 जुलाई 2010

अंडमान निकोबार द्वीप समूह ----

प्रस्तुत हैं , पोर्ट ब्लेयर --अंडमान निकोबार द्वीप समूह की २००६ की यात्रा के कुछ दृश्य ।


रौस आईलेंड : किनारे पर --



रौस आईलेंड में पुरानी गिरिजाघर --एक खँडहर




रौस आईलेंड के पिछवाड़े --समुद्र



रौस आईलेंड



एक म्यूजियम



एक म्यूजियम --पोर्ट ब्लेयर में


रिफ्लेक्शन



काला पानी --सचमुच काला

छई छप्पा छई --



अकेले की बीच

शनिवार, 26 जून 2010

चम्बा और टिहरी गढ़वाल की सैर ---

पिछले १५ सालों में पहली बार ऐसा हुआ कि परिस्थितियोंवश गर्मियों की छुट्टियों में पहाड़ों में जाने का प्रोग्राम नहीं बन पाया । इसलिए दो साल पहले टिहरी गढ़वाल के चम्बा कस्बे की सैर को याद कर , आइये आपको भी चम्बा की सैर कराते हैं ।

चम्बा , टिहरी जिले का एक महत्त्वपूर्ण क़स्बा है जो एक ओर मसूरी और दूसरी ओर ऋषिकेश से लगभग ६० किलोमीटर दूर है । दिल्ली से सड़क द्वारा करीब ३२० किलोमीटर की ड्राइविंग है । दिल्ली से हरिद्वार होते हुए , ऋषिकेश , फिर नरेन्द्रनगर होकर खूबसूरत सड़क पर गाड़ी चलाते हुए सफ़र का आनंद आ जाता है ।

ठहरने के लिए हमने चुना गढ़वाल मंडल विकास निगम का ये टूरिस्ट बंगला । चार बेड वाला फैमिली सुइट मात्र ८००-९०० रूपये में मिल जाता है । खाने का प्रबंध भी सही है ।


यह टूरिस्ट बंगला एक पहाड़ी की चोटी पर कस्बे के बीचों बीच बना है । हालाँकि क़स्बा तो वहां के लोगों के लिए शहर है , लेकिन टूरिस्ट्स के लिए वहां कुछ खास नहीं है ।

लेकिन टूरिस्ट बंगला से चारों ओर का नज़ारा बेहद खूबसूरत है ।

भागीरथी घाटी का एक मनोरम दृश्य।

एक और दृश्य।


चम्बा शहर का एक नज़ारा ।


दूर क्षितिज में जो पहाड़ की चोटी नज़र आ रही है , वहां मशहूर सुरखंडा देवी का मंदिर है । चम्बा से करीब ३०-३५ किलोमीटर दूर , यह फोटो टूरिस्ट बंगला से जूम करके लिए गया है ।

सुरखंडा देवी के मंदिर में ।

हम यहाँ पहली बार १९८४ में आये थे । तब यहाँ सब बिल्कुल सुनसान था । आजकल इतनी दुकाने और मकान बन गए हैं और इतना ट्रैफिक बढ़ गया है कि घंटों जाम लगा रहता है ।
मंदिर करीब एक किलोमीटर की चढ़ाई पर है ।
नीचे भंडारा चल रहा था जहाँ प्रसाद के रूप में पूरी सब्जी और हलवा खाने में बड़ा मज़ा आया ।


मंदिर तक का सारा रास्ता हरा भरा और पेड़ पौधों से भरा है ।


मंदिर तक पहुँचते पहुँचते बदल घिर आये । बादलों की छटा बड़ी सुहानी थी ।

चम्बा के पास ही है टिहरी बाँध जो भागीरथी और भिलंगाना नदियों के बहाव पर , विश्व के सबसे उचाई पर बने बांधों में से एक है । कभी यहाँ टिहरी शहर हुआ करता था । १९९४ और १९९६ में हर की दून और डोडी ताल की ट्रेकिंग पर जाते समय यहाँ से होकर गुजरे थे , तब यहाँ काम चल रहा था ।

बांध से बनी झील । इसमें पूरा टिहरी शहर डूब गया । बाहर से बाँध तो दिखाई भी नहीं देता ।



पुराने शहर का एक हिस्सा अभी भी दिख रहा है । पता चला यह यहाँ के राजा का महल होता था ।

नया टिहरी इसी जगह के पास पहाड़ पर बसाया गया है ।

सूर्यास्त का एक दृश्य।

तो कैसा लगा , घर बैठे चम्बा घूमना ।

नोट : सभी तस्वीरें अपने नोकिया मोबाईल फोन के कैमरे से ली गई हैं ।

मंगलवार, 4 मई 2010

कुछ मनभावन तस्वीरें --



बादलों के पार




ये कैसी छिपकली




फ्रेंच सर्कस





एक बिल्ली ऐसी भी





होटल के अन्दर




इतना बड़ा सेब भी होता है






फ्लाईट तो फ्रीडम






रविवार, 25 अप्रैल 2010

कैमरे की कैद में --कनाडा की खूबसूरती ---

हवा में --



आसमान से ---

सी अन टावर से --


वंडरलैंड --





कासा लोमा


टोरोंटो रात में ---

नायग्रा का एक पार्क --

नायग्रा --अमेरिकन साइड

नायग्रा फाल्स -ऊपर से --

क्यूबेक शहर का एक क्यूबेक --
मोंत्मोरेन्सी फाल्स --

सप्त फाल्स --

kyubek citi


highway


sunset

रविवार, 21 फ़रवरी 2010

दिल्ली की सैर ---गार्डन ऑफ़ फाइव सेंसिज ---

दिल्ली में महरौली से बदरपुर जाने वाली सड़क पर , क़ुतुब से एक किलोमीटर दूर दक्षिण की तरफ बना है --गार्डन ऑफ़ फाइव सेंसेज

प्रवेश करते ही --

हरियाली --


हरियाली के साथ फूल भी ---



हरियाली के बीच एक पेड़ जो वंचित रह गया ---



पेड़ों के बीच फव्वारा ---



थोडा जंगल नुमा भी ---



यहाँ बैठना मना है --पता नहीं क्यों ---



शांति , शांति , शांति ---



घुमावदार सीढियाँ ---


जंगल में बनी मूर्तियाँ ---


नोट : दिल्ली टूरिज्म की तरफ से आज शाम ६ बजे तक यहाँ गार्डन टूरिस्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया है। अगर अवसर मिले तो देखिये ज़रूर। बसंत ऋतू में फूलों की सैर कर के आनंद आ जायेगा।
लेकिन यदि न भी जा पायें तो चिंता मत करिया , हम आपको सैर करा देंगे कल अंतर्मंथन पर ।